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दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की 7 साल बाद जोरदार वापसी


दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की 7 साल बाद जोरदार वापसी


Posted By: Ameeta  |  Posted Date: 02-10-2025

   संस्कृति मंत्रालय के अधीन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) और द सोशल सर्किल द्वारा आयोजित होने वाले 15वां दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह 2026 की औपचारिकरूप से घोषणा हो गयी। राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाला यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह 4 से 8 मई 2026 तक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और डॉक्टर अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (डीओआईसी) जनपथ दिल्ली में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। डिफ के नाम से दुनिया भर में जाना जाने वाला दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह इस वर्ष और अधिक व्यापक और वैश्विक स्वरूप में सामने आ रहा है, जिसमें 60 से अधिक देशों की 175 फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही 100 से अधिक कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगी।

   समारोह का उद्घाटन दादा साहब फाल्के पुरस्कार विजेता विख्यात मलयालम फिल्मकार अडूर गोपालकृष्णन करेंगे। इस अवसर पर बंगाली सिनेमा के महान अभिनेता उत्तम कुमार को उनकी जन्मशती पर विशेष श्रद्धांजलि दी जाएगी। वहीं मोरक्को के प्रसिद्ध फिल्मकार मोहम्मद आहेद बेन्सौदा को सम्मानित करते हुए उनकी चर्चित फिल्म ‘द डिवोर्सिज ऑफ कासाब्लांका’ प्रदर्शित की जाएगी। बांग्लादेश की ख्यातिप्राप्त गायिका रूना लैला को मीनार-ए-दिल्ली अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा जबकि वरिष्ठ भारतीय गायिका उषा उथुप को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया जाएगा। वरिष्ठ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की बंगाली सिनेमा में वापसी को उनकी फिल्म ‘पुरातन: द एनिशेंट’ के माध्यम से विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा। रितुपर्णो सेनगुप्ता द्वारा अभिनीत और निर्मित इस फिल्म को दुनिया भर में सराहा जा रहा है। समारोह में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी मुख्य अथिति के तौर पर शामिल होंगी।

   इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सिनेमा की प्रमुख हस्तियों की भी प्रभावशाली उपस्थिति रहेगी, जिनमें केतन मेहता, दक्षिण भारतीय निर्देशक और अभिनेत्री रेवती, रितुपर्णो सेनगुप्ता, श्वेता मेनन, हिमानी शिवपुरी, राजपाल यादव, रघुवीर यादव, पियूष मिश्रा, यशपाल शर्मा और मुकेश तिवारी जैसे नाम शामिल हैं। इसके साथ ही लेबनान की सुपरस्टार मारवा करौनी, अफगानिस्तान की अभिनेत्री मलालाई ज़िक्रिया, ओमान की मारवत यूसुफ अल-बलुशी, मिस्र की नानेस अयमान, मोरक्को की मालक दहमूनी और बांग्लादेश के अशरफ शिशिर सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय कलाकार और फिल्मकार इस आयोजन में भाग लेंगे, जिससे यह समारोह एक वैश्विक सांस्कृतिक संगम का रूप लेगा। समारोह में विश्व स्तर पर ख्यात रूस की प्रमुख फिल्म संस्था रोस्किनो और मोजाम्बिक का राष्ट्रीय फिल्म संस्थान सहयोगी भागीदार के रूप में जुड़ रहे हैं। इस फिल्म समारोह में रूस और चीन की फिल्मों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जायेगा जबकि  अफ्रीकी सिनेमा को फोकस किया जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में न केवल फिल्मों का प्रदर्शन होगा बल्कि यह सिनेमा के माध्यम से सांस्कृतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी नई दिशा देगा। उल्लेखनीय है कि इस मंच पर प्रदर्शित भारतीय खंड की कई फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं जबकि कुछ अंतरराष्ट्रीय फिल्मों को ऑस्कर तक भेजा गया है। इसके अलावा यह समारोह भारत और विश्व के बीच फिल्मी आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है, जिसके तहत विभिन्न देशों के फिल्म समारोहों में भारतीय फिल्म कार्यक्रम भेजे जाते रहे हैं।

   समारोह में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। फिल्मों का चयन प्रसिद्ध फिल्म पत्रकार अनुराग पुनेठा, कवि और समीक्षक प्रमोद कौंसवाल और टीवी दुनिया का जानामाना नाम रीमा दिनेश कपूर द्वारा किया गया है जबकि ज्यूरी की अध्यक्षता रमन चावला करेंगे। समारोह को लेकर आम लोगों और फिल्म समीक्षकों में खासी दिलचस्पी बनी हुई है। प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक प्रवीण भटनागर ने कहा है कि हाल के समय में दिल्ली में अन्य फिल्म समारोह हुआ, जिससे गफलत पैदा हुई। इसलिए वर्गों में यह चर्चा रही है कि वह आयोजन इस अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह के पूर्व संस्करणों की संरचना और अवधारणा से प्रभावित या प्रेरित प्रतीत हुआ। 

   दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह को मिलते जुलते नाम से किया गया लेकिन इसकी भी राजधानी में धूम रही। जबकि दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म (डिफ) मौलिक, स्वतंत्र और अपने मूल स्वरूप को निरंतर बनाए रखने वाले मंच के रूप में देखा जाता है, जिसने वर्षों में अपनी अलग पहचान और विश्वसनीयता स्थापित की है।

   दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के संस्थापक और प्रेसिडेंट रामकिशोर पारचा का कहना है कि हमने विश्व सिनेमा के लिए इस बार जो भी श्रेणियां बनाई हैं, हम उसे विश्वसनीय तरीके से पेश करेंगे, जिसमें फिल्मों की वैश्विक परिस्थितियां तो इंगित होंगी ही फिल्म और समाज के आपसी ताने-बाने को लेकर विशेषज्ञों के साथ चर्चाएं भी आयोजित की जाएंगी। हम सिनेमा के इतिहास में जाएंगे और समाज की सच्चाई से सिनेमा को परखेंगे। हर वर्ष की तरह हमारी कोशिश होगी कि फिल्म समारोह का संदेश देश और दुनिया में मनुष्य और उसके संघर्षों के साथ उसकी जिजीविषा का खास आईना बन सके। 

175 फिल्में, 60+देशों की भागीदारी

   इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित होने वाले इस समारोह में फिल्मों को विभिन्न श्रेणियों में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे दर्शकों और फिल्म समीक्षकों को सिनेमा के विविध आयामों को समझने का अवसर मिलेगा। समारोह में विश्व सिनेमा, भारतीय सिनेमा, एनआरआई सिनेमा, शॉर्ट फिल्म्स, डॉक्यूमेंट्री और विशेष रेट्रोस्पेक्टिव सेक्शन जैसी अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं। विश्व सिनेमा खंड में विभिन्न देशों की समकालीन और क्लासिक फिल्मों का चयन किया गया है, जो सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय मुद्दों को वैश्विक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती हैं। भारतीय सिनेमा खंड में क्षेत्रीय और मुख्यधारा दोनों प्रकार की फिल्मों को शामिल किया गया है, जिनमें नई कहानियों और प्रयोगधर्मी सिनेमा की झलक देखने को मिलेगी। एनआरआई सिनेमा श्रेणी विशेष रूप से प्रवासी भारतीय फिल्मकारों की रचनात्मकता को सामने लाने का मंच बनेगी, जहां पहचान, संस्कृति और वैश्विक अनुभवों की कहानियां प्रमुखता से उभरेंगी।

   समारोह में प्रदर्शित की जाने वाली फिल्मों में कुछ विशेष प्रस्तुतियां पहले ही चर्चा का विषय बन चुकी हैं। मोरक्को के चर्चित फिल्मकार मोहम्मद अहद बेन्सौदा की फिल्म दि डिवोर्सिज ऑफ कासाब्लांका (The Divorcees of Casablanca) को खास तौर पर सराहा गया है, जो आधुनिक समाज में रिश्तों की जटिलताओं को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है। इसी तरह भारतीय खंड में चयनित कई फिल्में समकालीन सामाजिक बदलाव, पारिवारिक संरचना और व्यक्तिगत संघर्षों को बेहद प्रभावशाली ढंग से सामने लाने के लिए जानी जा रही हैं। शॉर्ट फिल्म और डॉक्यूमेंट्री श्रेणियों में भी कई ऐसी प्रविष्टियां शामिल हैं, जो अपने विषय, प्रस्तुति और तकनीकी उत्कृष्टता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा  करने की क्षमता रखती हैं।


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